नशे की लत से उजड़ते परिवार, महिलाओं पर बढ़ता बोझ

इंडिया न्यूज़ 24

साहिल अंसारी

छात्राओं ने रैली निकालकर जगाई अलख, नुक्कड़ नाटक में दिखाया नशे का दर्द

नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो के नारों से गूंजा आर्य कन्या डिग्री कॉलेज

 हापुड़। नशे की लत सिर्फ एक व्यक्ति का जीवन नहीं बिगाड़ती, बल्कि पूरे परिवार की खुशियां, आर्थिक स्थिति और भविष्य भी प्रभावित करती है। घर की जमा-पूंजी नशे में खर्च होने से परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता है। घरेलू कलह, मानसिक प्रताड़ना और बच्चों की शिक्षा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आर्य कन्या पाठशाला डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने नशे के खिलाफ मुहिम छेड़ी। रैली, नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ, भाषण और पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से छात्राओं ने समाज को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।

शुक्रवार को महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. साधना तोमर के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई-1 और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से संचालित मिशन शक्ति फेज-6 के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय शिविर आयोजित किया गया। ‘नशा एक सामाजिक कुरीति’ विषय पर आयोजित शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

नशे की कीमत चुकाता है पूरा परिवार

प्राचार्य प्रो. साधना तोमर ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक बुराई है। इसकी गिरफ्त में आने वाले व्यक्ति के साथ उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है। विशेष रूप से महिलाओं को आर्थिक तंगी, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। नशे में धन खर्च होने से घर की जरूरतें प्रभावित होती हैं और कई बार बच्चों की पढ़ाई तक बाधित हो जाती है।

उन्होंने कहा कि नशा मुक्त परिवार ही सशक्त नारी और सशक्त समाज की आधारशिला है। समाज को नशे के खिलाफ एकजुट होकर जागरूकता फैलानी होगी, ताकि युवाओं को इस बुराई से बचाया जा सके और प्रभावित परिवारों को सहयोग मिल सके।

नारों से किया लोगों को जागरूक

प्रो. मनीला रोहतगी के निर्देशन में आयोजित शिविर के प्रथम सत्र में डॉ. नीशू यादव के नेतृत्व में छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में जागरूकता रैली निकाली। ‘नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो’ और ‘नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत’ जैसे नारों से छात्राओं ने लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति सचेत करने की अपील की।

नुक्कड़ नाटक में दिखाई परिवार की पीड़ा

द्वितीय सत्र में छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ और भाषण के माध्यम से नशे के सामाजिक दुष्परिणामों को उजागर किया। नुक्कड़ नाटक में नशे की लत से प्रभावित व्यक्ति के परिवार और विशेष रूप से महिला की परेशानियों का मार्मिक चित्रण किया गया। प्रस्तुति ने बताया कि नशे की आदत किस तरह परिवार की आर्थिक स्थिति, आपसी संबंधों और घरेलू शांति को प्रभावित कर सकती है। कविता पाठ और भाषण के माध्यम से छात्राओं ने नशे को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसके उन्मूलन का आह्वान किया।

पोस्टर और स्लोगन से दिया नशा मुक्ति का संदेश

तृतीय सत्र में पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्राओं ने रंगों और आकर्षक संदेशों के माध्यम से नशा मुक्त समाज की कल्पना को कागज पर उकेरा। निर्णायक मंडल ने छात्राओं की रचनात्मकता और उनके जागरूकता संदेशों की सराहना की।

कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य प्रो. साधना तोमर ने कहा कि इस प्रकार के शिविर छात्राओं में सामाजिक दायित्व की भावना विकसित करते हैं और उन्हें समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। इस दौरान प्राध्यापिकाओं, छात्राओं और एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने नशा मुक्त, सुरक्षित एवं सशक्त समाज के निर्माण की शपथ ली। कार्यक्रम का संचालन एनएसएस इकाई-1 की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीशू यादव ने किया। महाविद्यालय की प्राध्यापिकाएं, छात्राएं और स्वयंसेविकाएं उपस्थित रहीं। अंत में एनएसएस लक्ष्य गीत और राष्ट्रगान के साथ शिविर का समापन हुआ।

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