पहले हुए शोध को खंगालकर नए विषय तलाशें, कार्यशाला में छात्राओं को दिए शोध के टिप्स
साहिल अंसारी
इंडिया न्यूज़ 24
हापुड़।
आर्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को शिक्षा शास्त्र विभाग की ओर से अनुसंधान एवं विकास समिति के तत्वावधान में ‘अनुसंधान में साहित्य की समीक्षा’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें छात्राओं को शोध शुरू करने से पहले संबंधित विषय पर हो चुके कार्यों का अध्ययन करने, शोध की कमियों को पहचानने और नए विषय की तलाश करने के तरीके बताए गए। कार्यशाला में छात्राओं को यह भी समझाया गया कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोतों का चयन बेहद जरूरी है।
प्राध्यापिका डॉ. प्रियंका सोनकर के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने साहित्य समीक्षा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साहित्य समीक्षा किसी विशेष विषय पर पहले से प्रकाशित शोध, पुस्तकों, शोध पत्रों और लेखों का गंभीर अध्ययन एवं मूल्यांकन है। इसके माध्यम से शोधार्थी यह समझ सकता है कि संबंधित विषय पर अब तक कितना और किस दिशा में काम हो चुका है। साथ ही पूर्व शोध में रह गई कमियों को तलाशकर नए शोध की संभावनाएं भी सामने आती हैं।
डॉ. प्रियंका सोनकर ने कहा कि शोध करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पहले किए जा चुके कार्य की अनावश्यक पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए शोधार्थी को संबंधित विषय के पुराने और नवीन साहित्य का व्यवस्थित अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को शोध प्रविधि से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी और उनके सवालों के जवाब देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया।
अनुसंधान एवं विकास समिति की अध्यक्ष प्रोफेसर मनीला रोहतगी ने साहित्य समीक्षा की आवश्यकता और शोध कार्य में इसकी भूमिका समझाई। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध की मजबूत नींव उसके विषय और पूर्व में उपलब्ध साहित्य की सही समझ पर निर्भर करती है।
शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अपर्णा त्रिपाठी ने साहित्य समीक्षा के विभिन्न स्रोतों की जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को प्रासंगिक, प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोतों के चयन तथा उनके उचित उपयोग के बारे में बताया।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर साधना तोमर ने छात्राओं को नए और वर्तमान समय से जुड़े विषयों पर शोध करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सीखी गई शोध तकनीकों का प्रयोग छात्राएं अपने अध्ययन एवं शोध कार्य में करें।
कार्यशाला में प्रोफेसर करुणा गुप्ता, डॉ. मीनू कश्यप सहित महाविद्यालय की प्राध्यापिकाएं तथा स्नातक और परास्नातक स्तर की छात्राएं मौजूद रहीं। अंत में डॉ. मीनू कश्यप ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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