सपा के पैदल मार्च पर पुलिस का ब्रेक, नारेबाजी-पुतला दहन के बाद कई कार्यकर्ता हिरासत में
हापुड़।
चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रविवार को पैदल मार्च निकालने का प्रयास किया। सपा कार्यालय से मार्च शुरू होते ही पुलिस ने धारा 144 लागू होने और बिना अनुमति जुलूस निकालने का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं को रोक दिया। इसको लेकर पुलिस और सपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध जताया और कार्यालय के बाहर पुतला दहन कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पुतले को बुझा दिया।
सपा की ओर से दो से आठ अक्टूबर तक 'लोकतंत्र बचाओ' और 'वोट बचाओ-देश बचाओ' अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को सपा कार्यालय पर बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्र हुए। कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
मार्च शुरू होते ही पुलिस ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने निषेधाज्ञा लागू होने का हवाला देते हुए जुलूस नहीं निकालने की अपील की। इस दौरान दोनों पक्षों में काफी देर तक बहस होती रही। कार्यकर्ता पुलिस की रोक के बावजूद आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे।
इसके बाद प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए अंबेडकर तिराहे की ओर बढ़े। यहां सपा जिलाध्यक्ष आनंद गुर्जर और सपा नेता सुधीर चौहान ने राष्ट्रगान शुरू किया। पुलिस ने कार्यक्रम समाप्त कर वापस लौटने का आग्रह किया, लेकिन प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे।
स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को वाहनों में बैठाकर हिरासत में लिया और पुलिस लाइन भेज दिया। मौके पर काफी देर तक पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निषेधाज्ञा के चलते जुलूस और प्रदर्शन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सपा जिलाध्यक्ष आनंद गुर्जर ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से मतदाताओं के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रही है। वहीं सपा नेता सुधीर चौहान ने कहा कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं था। पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज आगे भी उठाती रहेगी।
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