आर्य कन्या महाविद्यालय में सृजनात्मक लेखन कार्यशाला, छात्राओं ने सीखी अभिव्यक्ति की नई शैली
साहिल अंसारी
‘बताने के बजाय दिखाने’ की तकनीक और अलंकारों के प्रयोग से छात्राओं को कराया परिचित
हापुड़।
आर्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंग्रेजी विभाग की ओर से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘एथोस’ के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय सृजनात्मक लेखन कार्यशाला के तीसरे दिन छात्राओं को प्रभावी एवं रोचक लेखन की बारीकियां समझाई गईं। 17 से 23 सितंबर तक चल रही कार्यशाला में छात्राओं ने विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में सहभागिता कर अपने लेखन कौशल को निखारा।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. मीनू कश्यप ने ‘बताने के बजाय दिखाने’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावी लेखन में लेखक घटनाओं और भावनाओं को सीधे बताने के बजाय पात्रों के हाव-भाव, संवाद, व्यवहार, क्रियाओं और वातावरण के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है। इससे रचना अधिक जीवंत और प्रभावशाली बनती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से दोनों तकनीकों के अंतर को स्पष्ट करते हुए छात्राओं को अपने लेखन में इसका प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय सत्र में अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. अलका सिंह ने अलंकार विषय पर विशेष शिक्षण सत्र आयोजित किया। उन्होंने बताया कि भाषा में अलंकारों का प्रयोग रचना को अधिक प्रभावशाली, सुंदर और अभिव्यंजक बनाता है। उन्होंने उपमा, रूपक, मानवीकरण, अतिशयोक्ति और अनुप्रास सहित प्रमुख अलंकारों को सरल एवं रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। साथ ही छात्राओं को रचनात्मक लेखन में इनका प्रभावी प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने विषय से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने दिए गए रचनात्मक अभ्यासों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षिकाओं ने छात्राओं के लेखन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. साधना तोमर ने छात्राओं की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि सृजनात्मक लेखन विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्राओं से ऐसे शैक्षणिक अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी प्रतिभा निखारने का आह्वान किया।
विभागाध्यक्षा डॉ. अलका सिंह ने कहा कि सृजनात्मक लेखन केवल भाषा का अभ्यास नहीं, बल्कि विचारों, अनुभवों और कल्पनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करने की कला है। नियमित रूप से पढ़ने और लिखने से विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता का विकास होता है। उन्होंने छात्राओं को निरंतर अध्ययन और लेखन के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में छात्राओं ने सृजनात्मक लेखन के विभिन्न पहलुओं को समझते हुए सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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