पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले को नौ साल सात माह की सजा
साहिल अंसारी
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हापुड़ पुलिस की प्रभावी पैरवी का असर, 2017 के मामले में न्यायालय ने सुनाया फैसला
हापुड़। पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से हमला करने के करीब साढ़े नौ साल पुराने मामले में शुक्रवार को न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एडीजे/एफटीसी द्वितीय हापुड़ की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए आरोपित को नौ वर्ष सात माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 5,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। हापुड़ पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई प्रभावी पैरवी के बाद यह सजा सुनाई गई है।
पुलिस के अनुसार, 13 जनवरी 2017 को थाना हापुड़ नगर क्षेत्र में पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से हमला करने की घटना हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 34 और 482 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने घटना की विवेचना शुरू करते हुए साक्ष्य जुटाए और जांच पूरी करने के बाद 13 मार्च 2017 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था।
साढ़े नौ साल बाद आया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से घटना से संबंधित साक्ष्यों और पुलिस की कार्रवाई को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखा गया। हापुड़ पुलिस के अभियोजन एवं मॉनीटरिंग सेल ने मामले की लगातार निगरानी करते हुए प्रभावी पैरवी की। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर न्यायालय ने आरोपित को दोषी माना।
शुक्रवार को एडीजे/एफटीसी द्वितीय हापुड़ की अदालत ने दोषी को नौ वर्ष सात माह के साधारण कारावास की सजा सुनाते हुए 5,500 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। लंबे समय से न्यायालय में चल रहे मामले में फैसला आने के बाद पुलिस ने इसे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी की सफलता बताया।
गंभीर मामलों में सजा दिलाने पर जोर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपितों को न्यूनतम समय में सजा दिलाने के लिए गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी अभियोजन पैरवी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए विवेचक, अभियोजन विभाग, पैरोकार और मॉनीटरिंग सेल के बीच बेहतर समन्वय किया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पुराने मामलों में भी पैरवी को मजबूत करते हुए न्यायालय से दोषियों को सजा दिलाने की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में वर्ष 2017 के इस मामले में भी प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने दोषी को कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामले में शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार, विवेचक उपनिरीक्षक रामवीर सिंह यादव, पैरोकार महिला हेड कांस्टेबल मधु और कोर्ट मोहर्रिर महिला हेड कांस्टेबल अंजली तोमर का विशेष योगदान रहा।
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