राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में हापुड़ के मनोज वाल्मीकि को बड़ी जिम्मेदारी, सदस्य नियुक्त होने पर समर्थकों में खुशी
साहिल अंसारी
हापुड़। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नई नियुक्तियों की घोषणा कर दी है। आयोग की नई टीम में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता एवं हापुड़ निवासी मनोज कुमार वाल्मीकि को सदस्य नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस जिम्मेदारी के बाद उनके समर्थकों और सामाजिक संगठनों में खुशी का माहौल है। लोगों ने इसे सफाई कर्मचारियों और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार भगवत प्रसाद मकवाना को आयोग का अध्यक्ष और कैशब बिहारी को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं मनोज कुमार वाल्मीकि के अलावा बरेली की वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. सुषमा गौड़ियाल और पूर्व निकाय इंजीनियर रवि रामू कालोसे को आयोग का सदस्य बनाया गया है। नई टीम से सफाई कर्मचारियों के कल्याण, अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रभावी कार्य की उम्मीद जताई गई है।
36 वर्षों से समाजसेवा में सक्रिय
मनोज कुमार वाल्मीकि लंबे समय से सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। करीब 36 वर्षों से पार्टी और समाज के लिए कार्य कर रहे मनोज वाल्मीकि ने सफाई कर्मचारियों, अनुसूचित जाति तथा समाज के वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। वर्ष 2019 से 2022 तक वह उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान, उनके अधिकारों की रक्षा और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए काम किया।
मनोज कुमार वाल्मीकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वर्ष 2006 में तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। सामाजिक गतिविधियों के साथ ही संगठनात्मक और प्रशासनिक कार्यों में भी उनका अनुभव रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं सफाई कर्मचारी कल्याण संगठनों में जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रयास किए हैं।
सफाई कर्मचारियों की समस्याओं पर रहेगा जोर
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति को सफाई कर्मचारी समाज के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग सफाई कर्मचारियों से जुड़े अधिकारों, कल्याण और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में मनोज वाल्मीकि के अनुभव का लाभ राष्ट्रीय स्तर पर सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में भी सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से उठाया था। आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान, रोजगार से जुड़ी समस्याओं, सरकारी योजनाओं का लाभ और सम्मानजनक जीवन जैसे मुद्दों को लेकर लगातार प्रयास किए। उनकी नई जिम्मेदारी से देशभर में सफाई कर्मचारियों की शिकायतों को प्रभावी ढंग से सामने रखने और उनके समाधान की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
अनुभवी हाथों में आयोग की कमान
आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं। अनुसूचित जातियों के कल्याण और सशक्तीकरण के क्षेत्र में उन्हें लंबा अनुभव है। वह उत्तराखंड सरकार में सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष जैसे पदों पर रह चुके हैं। इसके अलावा एनएचपीसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक और हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का निषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत गठित केंद्रीय निगरानी समिति में भी भूमिका निभा चुके हैं।
उपाध्यक्ष कैशब बिहारी ओडिशा के निवासी और कृषक हैं। वह भी अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं और लंबे समय से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान से जुड़े अभियानों में सक्रिय रहे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से उन्होंने वंचित वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए काम किया है।
मंत्रालय ने जताया भरोसा
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नवनियुक्त टीम पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का अनुभव आयोग के दायित्वों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में उपयोगी साबित होगा। शिक्षा, प्रशासन, समाजसेवा और जनकल्याण से जुड़े अनुभवों का यह समन्वय सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मनोज कुमार वाल्मीकि की राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में नियुक्ति को हापुड़ और उत्तर प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सफाई कर्मचारियों और वंचित वर्गों के बीच लंबे समय तक काम करने का अनुभव अब राष्ट्रीय मंच पर उनके लिए उपयोगी साबित होगा।
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