मेडिकल शिक्षा को आधुनिक बनाने पर जोर, तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन

साहिल अंसारी

, हापुड़। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसआइएमएस) में मेडिकल फैकल्टी की शिक्षण क्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय बेसिक कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन (बीसीएमई) का समापन हुआ। कार्यक्रम में चिकित्सकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, पाठ्यक्रम नियोजन और प्रभावी मूल्यांकन तकनीकों की जानकारी दी गई।

मेडिकल एजुकेशन यूनिट (एमईयू) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने दक्षता आधारित चिकित्सा शिक्षा, विद्यार्थी केंद्रित शिक्षण, मूल्यांकन रणनीति, रचनात्मक फीडबैक और कक्षा एवं क्लीनिकल शिक्षण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। इस दौरान समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास, सहभागिता आधारित गतिविधियां और अनुभव साझा करने के सत्र आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में चिकित्सकों ने मेडिकल शिक्षण और मूल्यांकन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए व्यावहारिक उपाय तलाशे। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें मार्गदर्शक, प्रशिक्षक, मूल्यांकनकर्ता और विद्यार्थियों के लिए आदर्श की भूमिका भी निभानी होगी।

कार्यक्रम का संचालन डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. बरखा गुप्ता के नेतृत्व में हुआ। संस्थान के फाउंडर एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन और वाइस चेयरपर्सन डॉ. रम्या रामचंद्रन के मार्गदर्शन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर डॉ. आरके सहगल, जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन और निदेशक रघुवार दत्त का सहयोग रहा।

एमईयू समन्वयक डॉ. क्राति वर्मा ने कार्यक्रम का समन्वय किया। रिसोर्स फैकल्टी में डॉ. संजीव डिमरी, डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. शलीन जैन, डॉ. अमित अग्रवाल और डॉ. सचेत दावर शामिल रहे। संस्थान ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के प्रति आभार जताया।

Comments

Popular posts from this blog

50 हजार रुपये की रिश्वत लेते कानूनगो रंगे हाथ गिरफ्तार, एंटी करप्शन टीम ने क्लीनिक पर बिछाया जाल

गौरव हत्याकांड में पुलिस का शिकंजा: कचहरी में सरेंडर करने पहुंचे दो दबोचे, मुठभेड़ में तीसरे के पैर में लगी गोली

राधा-कृष्ण के मनमोहक रूप में नजर आए नन्हे-मुन्ने, जन्माष्टमी के रंग में रंगा ओएमजी स्कूल