शिक्षा में समान अवसर और योग्यता को मिले सम्मान, छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
साहिल अंसारी
हापुड़। शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण नीति में सुधार की मांग को लेकर छात्रों एवं युवाओं ने आवाज बुलंद की। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शिक्षा के क्षेत्र में सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने, योग्यता को महत्व देने और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। ज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कुछ नियमों की भी समीक्षा करने का अनुरोध किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी को आगे बढ़ने का समान अवसर प्राप्त हो। किसी भी विद्यार्थी के साथ उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कुछ प्रावधानों पर असहमति जताते हुए उनकी समीक्षा करने और आवश्यक बदलाव किए जाने की मांग की।
छात्रों का कहना था कि शिक्षण संस्थानों में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले। शिक्षा के क्षेत्र में योग्यता और परिश्रम को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराकर ही राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को मिले सहायता
ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी अपनी मांग रखी गई। छात्रों ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार विभिन्न सामाजिक वर्गों में मौजूद हैं। ऐसे में जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा में आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण आधार बनाए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने गरीब विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, निश्शुल्क प्रशिक्षण और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की। उनका कहना था कि आर्थिक तंगी के कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों में बदलाव, आर्थिक आधार पर आरक्षण तथा शिक्षा में योग्यता को महत्व देने सहित तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए बेहतर सहायता सुनिश्चित कराना है।
राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया। इस दौरान छात्रों, युवाओं और सर्वसमाज के लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
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