यूपीआई शुल्क पर व्यापारियों का हल्लाबोल, 15 अक्टूबर तक की मोहलत; मांग नहीं मानी तो बंद कर देंगे ऑनलाइन भुगतान

साहिल अंसारी
दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत एमडीआर शुल्क वापस लेने की मांग, जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजा ज्ञापन

हापुड़। यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क को लेकर व्यापारियों का आक्रोश सामने आया है। मंगलवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल के नेतृत्व में व्यापारियों ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत शुल्क वापस लेने की मांग की गई। व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 अक्टूबर तक सरकार ने प्रस्तावित शुल्क के संबंध में निर्णय में संशोधन नहीं किया तो जिलेभर में व्यापारी सामूहिक रूप से ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे।

 डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद शुल्क लगाने पर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने कहा कि सरकार लगातार डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात करती है। व्यापारियों ने भी सरकार की डिजिटल भुगतान नीति का समर्थन करते हुए ग्राहकों को यूपीआई के माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई है। अब दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी से कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। व्यापारियों ने इस प्रस्ताव को अपने हितों के विपरीत बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।

व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि किराना, मेडिकल, कपड़ा, होटल, रेहड़ी-पटरी समेत विभिन्न छोटे-बड़े कारोबारों में यूपीआई भुगतान रोजमर्रा के लेनदेन का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में शुल्क लागू होने पर व्यापारियों के लाभ पर असर पड़ने की आशंका है। विशेष रूप से छोटे दुकानदारों के लिए अतिरिक्त शुल्क आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है।

ऑनलाइन कारोबार के बढ़ते प्रभाव से पहले ही दबाव में व्यापारी

ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफार्मों के बढ़ते प्रभाव के कारण छोटे और परंपरागत व्यापारियों का कारोबार पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहा है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाकर ग्राहकों को सुविधा दी है। इसके बावजूद यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क लगाने से उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि व्यापारियों से किसी भी प्रकार का एमडीआर शुल्क नहीं लिया जाए। साथ ही प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए, जिससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उपयोग करने वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े।

 15 अक्टूबर के बाद ऑनलाइन भुगतान बंद करने का ऐलान

व्यापारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य ग्राहकों को परेशान करना नहीं है, लेकिन यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो वे विरोध स्वरूप ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे। व्यापार मंडल ने 15 अक्टूबर तक का समय देते हुए कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर जिलेभर में व्यापारी सामूहिक रूप से नकद भुगतान को प्राथमिकता देंगे।

इस घोषणा से बाजारों में डिजिटल भुगतान की सुविधा और ग्राहकों की खरीदारी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। यदि व्यापारी ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करना बंद करते हैं तो ग्राहकों को खरीदारी के लिए नकदी साथ रखनी पड़ सकती है। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनके हितों को ध्यान में रखते हुए समय रहते सकारात्मक निर्णय लेगी।

 ये व्यापारी रहे मौजूद

प्रदर्शन में पश्चिम उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल के चेयरमैन नरेंद्र अग्रवाल, मुख्य संरक्षक प्रदीप गर्ग (हाइड्रो वाले), जिला अध्यक्ष संजय कुमार डावर (एडवोकेट), जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित गोयल (आकृति), जिला महामंत्री दीपक बंसल (पक्का बाग) समेत संगठन के पदाधिकारी और व्यापारी मौजूद रहे। व्यापारियों ने सरकार से प्रस्तावित यूपीआई शुल्क वापस लेने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बिना अतिरिक्त शुल्क के जारी रखने की मांग की।

Comments

Popular posts from this blog

50 हजार रुपये की रिश्वत लेते कानूनगो रंगे हाथ गिरफ्तार, एंटी करप्शन टीम ने क्लीनिक पर बिछाया जाल

गौरव हत्याकांड में पुलिस का शिकंजा: कचहरी में सरेंडर करने पहुंचे दो दबोचे, मुठभेड़ में तीसरे के पैर में लगी गोली

राधा-कृष्ण के मनमोहक रूप में नजर आए नन्हे-मुन्ने, जन्माष्टमी के रंग में रंगा ओएमजी स्कूल