माइक्रोबायोम से बदलेगा बीमारी के इलाज का तरीका, हापुड़ में जुटे देशभर के विशेषज्ञ


साहिल अंसारी

राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने माइक्रोबायोम आधारित उपचार और प्रिसीजन मेडिसिन पर किया मंथन

हापुड़। चिकित्सा विज्ञान में तेजी से उभर रहे माइक्रोबायोम आधारित उपचार और प्रिसीजन मेडिसिन की संभावनाओं पर सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी में देशभर के विशेषज्ञों ने मंथन किया। राष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, वैज्ञानिकों, फार्मेसी विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर आधुनिक चिकित्सा में माइक्रोबायोम की भूमिका पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि माइक्रोबायोम पर होने वाला शोध भविष्य में रोगों की पहचान और उपचार के क्षेत्र में नई दिशा दे सकता है।

उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी-यूपी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रायोजन में आयोजित सम्मेलन का विषय 'माइक्रोबायोम आधारित चिकित्सीय उपचार : प्रिसीजन मेडिसिन के लिए उभरते अवसर' रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।

इस अवसर पर सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक रघुवर दत्त और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल सी.एस. अहलुवालिया मौजूद रहे। अतिथियों ने माइक्रोबायोम अनुसंधान को आधुनिक चिकित्सा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

फार्मेसी विभाग के प्राचार्य एवं सम्मेलन के अध्यक्ष-संयोजक डॉ. नितिन कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों और शोध गतिविधियों की जानकारी दी। सह-संयोजक डॉ. निधि त्यागी ने आयोजन की विभिन्न गतिविधियों का समन्वय किया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की वित्त समिति के अध्यक्ष एवं एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ के फार्मेसी विभागाध्यक्ष ने माइक्रोबायोम आधारित दवाओं और उपचार की संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने फार्मेसी शिक्षा में आने वाले नए पाठ्यक्रम और मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

मुख्य वक्ता जामिया हमदर्द, नई दिल्ली के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभागाध्यक्ष डॉ. जावेद अली ने माइक्रोबायोम और मानव स्वास्थ्य के संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रिसीजन मेडिसिन और फार्मास्युटिकल अनुसंधान में माइक्रोबायोम की भूमिका समझाई। दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के डॉ. राजीव टोंक, सुभारती विश्वविद्यालय के डॉ. शौकेंद्र कुमार और डॉ. गौरव कैथवास ने भी विचार रखे।

शोध प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर

सम्मेलन में शोधार्थियों ने मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोधकार्य एवं वैज्ञानिक निष्कर्ष प्रस्तुत किए। मौखिक प्रस्तुति में जामिया हमदर्द के शोधार्थी अभिषेक त्यागी प्रथम रहे। सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के बीफार्मा चतुर्थ वर्ष के अफजल खान और शगुन ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

पोस्टर प्रस्तुति में सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के विनीत चौधरी प्रथम रहे, जबकि आरएसडी एकेडमी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मुरादाबाद के उमंग गौर और मानव मिश्रा ने द्वितीय स्थान हासिल किया। विजेताओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डिपेश और नेहा वर्मा ने किया। समापन प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन तथा उपाध्यक्ष डॉ. रम्या रामचंद्रन ने सम्मेलन के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं दीं।

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