प्रेमी के साथ मिलकर सात परिजनों की हत्या, शबनम को मथुरा जेल में दी जानी थी फांसी


सोनू मसूदी 

मथुरा। अमरोहा के चर्चित बावनखेड़ी हत्याकांड ने वर्ष 2008 में पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में शबनम और उसके प्रेमी सलीम को परिवार के सात सदस्यों की हत्या का दोषी ठहराया गया था। शबनम को मथुरा जेल में फांसी देने की तैयारी भी की गई थी।

14 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र के बावनखेड़ी गांव में शबनम ने अपने परिवार के सदस्यों की हत्या की साजिश रची थी। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार के लोगों को पहले नशीला पदार्थ दिया गया। इसके बाद प्रेमी सलीम को बुलाया गया और दोनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। मृतकों में शबनम के पिता शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, फुफेरी बहन राबिया और मासूम भतीजा अर्श शामिल थे।

पुलिस जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा। अमरोहा की अदालत ने वर्ष 2010 में शबनम और सलीम को मृत्युदंड सुनाया। बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी। राष्ट्रपति के स्तर पर दया याचिका भी खारिज हो चुकी थी।

शबनम को फांसी देने के लिए मथुरा जेल का फांसीघर तैयार किए जाने की खबर सामने आई थी। यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में रहा क्योंकि शबनम को स्वतंत्र भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला कैदी बताया गया था। हालांकि, दया याचिका और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के चलते प्रस्तावित फांसी उस समय टल गई थी।

बावनखेड़ी की इस वारदात को उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित सामूहिक हत्याकांडों में गिना जाता है। प्रेम संबंध को लेकर परिवार के विरोध के बीच उठाया गया यह कदम अंततः सात जिंदगियों के खात्मे और शबनम-सलीम को मृत्युदंड तक ले गया।

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