आर्य कन्या पीजी कॉलेज में तिलक-आजाद जयंती पर संगोष्ठी, प्राचार्या बोलीं— राष्ट्रप्रेम और त्याग से बनेगा विकसित भारत



साहिल अंसारी
हापुड़। आर्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हापुड़ के इतिहास विभाग द्वारा गुरुवार को इतिहास मंथन क्लब के अंतर्गत महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दोनों महान विभूतियों के राष्ट्रवादी विचारों, स्वराज की अवधारणा और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।

इतिहास विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर मनीला रोहतगी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा, आत्मसम्मान और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि तिलक के "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" के विचार ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी, जबकि चंद्रशेखर आजाद ने अपने अदम्य साहस और बलिदान से युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई।

संगोष्ठी में छात्राओं वंशिका, अनम, मीनू, शिफा, सना, अल्फिशा, काजल, कंचन, तनु और पूजा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। छात्राओं ने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग, बलिदान और क्रांतिकारी आंदोलन में उनके योगदान का विस्तार से उल्लेख करते हुए उनके आदर्शों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर साधना तोमर ने अपने संबोधन में कहा कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्श, राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग को जीवन में अपनाकर ही विकसित भारत के निर्माण का सपना साकार किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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