डायरिया से बच्चों की सुरक्षा का संकल्प: सिम्स हापुड़ के ओआरएस सप्ताह अभियान ने दिया जागरूकता का बड़ा संदेश
साहिल अंसारी
हापुड़। बच्चों में डायरिया के कारण होने वाले डिहाइड्रेशन से बचाव और ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड हॉस्पिटल (सिम्स) के बाल रोग विभाग ने ओआरएस सप्ताह-2026 के तहत दो दिवसीय जनजागरूकता अभियान चलाया। कार्यक्रम में मेडिकल विद्यार्थियों, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके परिजनों को डायरिया से बचाव तथा ओआरएस के सही उपयोग की जानकारी दी गई।
अभियान की शुरुआत डिजिटल पोस्टर प्रस्तुति से हुई, जिसमें एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने ओआरएस बनाने की सही विधि, उसके उपयोग, लाभ और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उसकी भूमिका पर शोध आधारित प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने डायरिया के दौरान डिहाइड्रेशन की समय पर पहचान, घर पर ओआरएस के इस्तेमाल, स्वच्छता, पोषण और बच्चों में मृत्यु दर कम करने के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी। बाल रोग विभाग के शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए साक्ष्य आधारित चिकित्सा ज्ञान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इस दौरान प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर डायरिया की रोकथाम, समय पर ओआरएस देने, स्तनपान जारी रखने, स्वच्छ पेयजल, हाथों की सफाई और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने का संदेश दिया। मरीजों, उनके परिजनों, नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थियों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। साथ ही पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से ओआरएस की सही तैयारी, जिंक थेरेपी, पोषण और स्वच्छता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं।
कार्यक्रम का आयोजन बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश कुमार गोयल के निर्देशन में हुआ। डॉ. भावना कोहली, डॉ. हीरू नवनी, डॉ. भरत गुप्ता, डॉ. आफिया खान, डॉ. पल्लवी गुप्ता, डॉ. दिव्या जैन, डॉ. आशीष चौहान, डॉ. भावेश और डॉ. स्वाति सहित विभाग के सभी चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ ने सक्रिय सहयोग दिया। संस्थान की प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान बच्चों में रोकी जा सकने वाली बीमारियों को कम करने और समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी से अपील की गई कि डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ओआरएस को अपनाएं और हर बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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